
हरि राव होलकर (1833-1834)
• अंतत: सन् 1834 में हरिराव को औपचारिक रूप से गद्दी पर बैठाया गया जल्द ही गर्वनर जनरल ने लिखित रूप से उन्हे मान्यता दी।
• राज्य के दुर्भाग्य से तात्या जोग की मृत्यु होने पर पूरा प्रशासन असमंजस में पढ़ गया । सन् 1837 में लार्ड ऑकलैन्ड ने राज्य को ब्रिटिश प्रबन्धन में लेने की धमकी दी, इस भय से कई परिवर्तन एवं सुधार किये गये खर्चे में कटौती की गई, भ्रष्ट अधिकारयों को बर्खास्त किया गया और भूमि मुल्यांकन की समस्या में सुधार लया गया।
• जैसे ही हरिराव महाराज का स्वास्थ बिगड़ने लगा, प्रशासक ने उन्हे एक वारिस नांमाकित करने को कहा, उन्होने दूर के रिश्तेदार 13 वर्षीय खाण्डेराव को सन् 1841 में गोद लिया।

खाण्डेराव होलकर
• हरिराव होलकर का निधन अक्टूबर 1843 में हुवा और अगले माह खाण्डेराव को गददी पर बिठाया गया था ।
• गद्दी पर बैठने के तीन माह के बाद उनका निधन हो गया तब वे 15 वर्ष के थे और अविवाहित थे उनके निधन से एक बार फिर होलकर राज्य बिना उत्तराधिकारी के हो गया।
• हालात ऐसे थे कि होलकर रियासत अस्तित्व खतरे में था, नये प्रशासक सर रॉबर्ट हैमिल्टन ने इन्दौर में सिर्फ कार्यालय डाला था, मॉ साहब की रजामंदी से उन्होने जून 1844 में भाउ होलकर के छोटे बेटे तुकोजीराव (द्वितीय) को बिठाया था ।

शिवाजी राव होलकर (1886-1903)
• सन् 1885 में शिवाजी राव जो तुकोजीराव होलकर द्वितीय के बड़े पुत्र थे, ने उनके सफल शासन को प्राप्त किया।
• उन्होंने अपने प्रतिष्ठीत पिता के अच्छे कार्यों को आगे बढ़ उन्होंने राज्य में व्याप को बढ़ावा देने के लिए पारगमन शुल्क समाप्त किया फिर भी राज्य के लिए और अधिक राजस्व प्राप्त किया ।
• राज्य के राजस्व ढ़ाचे में बहुत सी विसंगतियों की, इन्दौर रेसीडेन्सी बाजार और महू छावनी बाजार अंग्रेजों के अधीन न होने से कर मुक्त थे, इस विसंगति को दूर करने के लिए शिवाजी राव ने एक कर मुक्त बाजार की स्थापना कि जो शिवगंज कहलाया ज कि आज सियागंज के नाम से जाना जाता है, उन्होंने सलामण्डल पहाड़ी पर एक द मंजिला शिकार गाह का निर्माण करवाया जो गर्मीयों के लिए एकान्तवास के रूप में भी जाना जाता है।
• 1861 एवं 1896 में क्रमश: लाई लेसडाउन एवं लार्ड एल्गिन ने राज्य का दौरा किया।
• 1899 में अंग्रेजो द्वारा इन्दौर राज्य को सुधार रूप से चलाने के लिए एक पृथक नियुक्त किया गया अब महाराज को सभी मामलों में प्रसाशक से परामर्श करना जरूरी था।
• 1899 - 1900 के मध्य गंभीर अकाल और 1903 में प्लेग की महामारी से राज्य के संसाधनों की क्षति हुई।
• 1902 में अंग्रेजों के रुपयों को राज्य के मानक लिखे के रूप में अपनाया गया।
• महाराज व्यक्तिगत रूप से होलकर कॉलेज एवं सचिवालय (मोतीबंगला की देखभाल करते थे।
• जनवरी 1903 में अपने पुत्र तुकोजीराव होलकर द्वितीय के हित में उन्होंने नही झड़ दी।
• सन् 1908 में उनका निधन हो गया।
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