सन् 1728 से 1948 तक के संदर्भ में
होलकर राजवंश के संस्थापक सुबेदार मल्हारराव होलकर ने अपने अदम्य शौर्य, साहस एवं पराक्रम एवं मालवाधिपति के रूप में इन्दौर राज्य सन् 1728 में प्राप्त किया। प्रजाहितकारिणी के रुप में लोकमाता; दानधर्म एवं लोक कल्याण द्वारा सम्पूर्ण देश की राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक एकता की प्रतीक, सर्वधर्म समभाव तथा न्यायनिपुण, देवी अहिल्याबाई होलकर का नाम आसेतुहिमाचल सुविख्यात है। वीरता, प्रताप एवं देशभक्ति तथा विदेशी शक्ति का साम्राज्य देश में स्थापित नहीं होने के लिए कृतसंकल्प, छत्रपति शिवाजी महाराज जैसा अलौकिक संघर्षमय जीवन जिनका रहा, वे वीरश्रेष्ठ स्वातंत्र्यप्रेमी प्रथम यशवंतराव होलकर, आधुनिक इन्दौर के विकास के शुभारंभकर्ता तथा व्यापार, उद्योग उन्नति में जिन्होंने विशेष कार्य किए, वे द्वितीय तुकोजीराव होलकर, अपने बुद्धिकौल्य द्वारा होलकर राज्य की चहुॅमुखी उन्नति हेतु क्रियाशील, प्रकांड विद्वान, श्रीमंत शिवाजीराव होलकर अत्यन्त सौजन्यशील स्वभाव से परिपूर्ण, इन्दौर की व्यापार-उद्योग को प्रगति पथ पर लाने का श्रेय जिन्हें हैं, वे कला, संस्कृति के अनुरागी, प्रजापालक श्रीमंती तुकोजीराव होलकर होलकर तृतीय एवं होलकर राजवंश के अंतिम नरेश के रूप में श्रीमंत सवाई यशवंतराव होलकर जैसे प्रखर बुद्धिवादी, स्वतंत्रता प्रेमी, आदर्श विद्यानुरागी, समाज के दलितों, पीड़ितों के मसीहा इन्दौर राज्य की चहुँमुखी उन्नति कर देश को स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् यह शिवार्पित होलकर राज्य भारत सरकार को सर्वप्रथम समर्पित कर देशभक्ति एवं स्वातंत्र्यप्रियता के प्रति अपनी प्रगाढ़ श्रद्धा प्रकट की । होलकर राज्य त्यागकर जनकल्याण की ओर अग्रसर हुए। ऐसे थे इन्दौर के गौरवशाली होलकर राजवंश के 14 नरेश, जिनका 1728 से 1948 तक 220 वर्षों का उज्जवल एवं यशस्वी प्रशासकीय कार्यकाल रहा।
श्री मल्हारी मार्तण्ड देवस्थान मंदिर के पुर्ननिर्माण का लोकार्पण श्रीमंत महाराणी उषादेवीजी के शुभहस्ते 11 मार्च 2007 को सम्पन्न हुआ।
सन् 1962 से श्रीमंत महाराणी उषादेवी (सुपुत्री- अंतिम नरेश द्वितीय यशवंतराव) अध्यक्ष खासगी ट्रस्ट इन्दौर द्वारा जनकल्याण में शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, क्रीड़ा क्षेत्र के योगदान में अपने होलकर राजवंश के पूर्वजो की परंपरानुसार आज इन्दौर की महारानी के रूप सक्रिय है । इन्दौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा प्रांगण में होलकर राजवंश के कुलदेवता श्री मल्हारी मार्तण्ड देवस्थान मंदिर सन् 1984 के दंगों में भस्मीभूत हुआ था। होलकर राजवंश की प्रातःस्मरणीया एवं महान शिवभक्त महारानी लोकमाता देवी अहिल्याबाई के शुभाशीष और उन्हीं की विरासत की वर्तमान राजरानी श्रीमंत महारानी उषादेवी जी की प्रेरणा से कुलदेवता श्री मल्हारी मार्तण्ड देवस्थान मंदिर का 2 करोड़ की लागत से पुर्ननिर्माण किया। मंदिर का लोकार्पण रविवार 11 मार्च 2007 को धार्मिक विधिविधान में श्रीमंत महाराणी उष देवी के शुभहस्ते संपन्न हुआ। देवी अहिल्या खासगी ट्रस्ट के प्रमुख ट्रस्टी माननीय श्रीमान सतीश मल्होत्रा सा. के कुशल मार्गदर्शन में व्यक्तिगत रुचि से ही यह कार्य खासगी ट्रस्ट द्वारा पूर्ण हुआ । माननीय समस्त ट्रस्टीयों का सहयोग एवं तत्कालीन सचिव स्व. कैलाश तिवारी जी की कर्मठता, परिश्रम सदैव स्मरणीय रहेगा । सहसचिव श्रीमती रीता कानूनगो एवं समस्त माननीय कलामनीषी, वास्तुविद् इंजिनियर्स, कर्मचारीगण, कामगार भी धन्यवाद के पात्र है । इन्दौर की माननीय सांसद श्रीमती सुमित्राताई महाजन एवं म.प्र. शासन का पुरातत्व विभाग के प्रोत्साहन हेतु भी साधुवाद । इन्दौर का पुरातन होलकर राजवंश के कुलदेवता के रूप में पुर्ननिर्मित श्री मल्हारी मार्तण्ड मंदिर एवं कई समाजों के कुलदेवता के रूप में भी यह मंदिर, होलकर राजवंश के खासगी ट्रस्ट द्वारा आम जनता के लिए प्रदत्त एक अमूल्य धरोहर है। कुलदेवता के रूप में एक धार्मिक आस्था के केन्द्र के रूप में भी सदैव दर्शनीय रहेगा।

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